आज मुंबई के भिंडी बाजार स्थित हांडीवाला मस्जिद के परिसर में रज़ा अकादमी के उलेमा और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया. (Pics / Shadab Khan)
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह विधेयक वक्फ की संपत्तियों के अधिकारों और स्वायत्तता को प्रभावित करता है, जिससे समुदाय की धार्मिक और सामाजिक स्वतंत्रता पर सीधा असर पड़ेगा.
क्या है वक्फ संशोधन विधेयक?: वक्फ अधिनियम का मूल उद्देश्य धार्मिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए दान की गई संपत्तियों को संरक्षित करना था.
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 में सरकार ने कुछ ऐसे प्रावधान जोड़े हैं जिससे राज्य सरकारों को वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण बढ़ाने का अधिकार मिल जाता है.
इन संशोधनों के तहत, वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना संपत्तियों पर कार्य करना प्रतिबंधित किया गया है और कई मामलों में सरकारी दखल को बढ़ावा मिला है.
रज़ा अकादमी की आपत्ति
रज़ा अकादमी के प्रमुख उलेमा का कहना है कि यह संशोधन मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का हनन है. उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को खतरा है, बल्कि मस्जिदों, दरगाहों और मदरसों जैसे धार्मिक संस्थानों के कार्यों में भी बाधा उत्पन्न होगी.
प्रदर्शन के दौरान उलेमाओं ने मांग की कि सरकार इस विधेयक पर पुनर्विचार करे और उसे धार्मिक भावनाओं के अनुकूल संशोधित किया जाए.
अकादमी के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे जल्द ही देशव्यापी आंदोलन भी करेंगे.
हालांकि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली.
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