Updated on: 03 April, 2025 03:18 PM IST | mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent
मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा वक्फ विधेयक के ज़रिए मुसलमानों के नाम पर दिखावे की राजनीति कर रही है, जबकि असल मंशा वक्फ की जमीनें छीनकर अपने उद्योगपति मित्रों को सौंपने की है.
X/Pics, Uddhav Thackeray
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को लेकर देशभर में सियासी बहस तेज हो गई है. इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला. ठाकरे ने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर भाजपा की `चिंता` इतनी बनावटी है कि इससे पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना भी शर्मिंदा हो जाएंगे.
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मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा वक्फ विधेयक के ज़रिए मुसलमानों के नाम पर दिखावे की राजनीति कर रही है, जबकि असल मंशा वक्फ की जमीनें छीनकर अपने उद्योगपति मित्रों को सौंपने की है. ठाकरे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह एक तरफ तो धर्म के नाम पर राजनीति कर रही है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज की संपत्तियों पर नजर गड़ाए हुए है.
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— ShivSena - शिवसेना Uddhav Balasaheb Thackeray (@ShivSenaUBT_) April 3, 2025
उन्होंने लोकसभा में विधेयक पारित होने पर कहा कि सरकार ने आधी रात के बाद बहुमत के बल पर यह विधेयक पास करवा लिया, जो यह दर्शाता है कि उसमें इस विषय पर खुली बहस से बचने की प्रवृत्ति है. बुधवार को हुए मतदान में 288 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 232 ने विरोध में मतदान किया.
ठाकरे ने भाजपा के हिंदू-मुस्लिम एजेंडे को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “जब केंद्र में लगातार तीसरी बार सरकार बना ली है, चीज़ें उनके मुताबिक़ चल रही हैं, तो फिर बार-बार हिंदू-मुस्लिम मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है?” उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि अगर वह मुसलमानों को इतना नापसंद करती है तो अपने झंडे से हरे रंग को भी हटा दे.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें देश को अमेरिका द्वारा लगाए जा सकने वाले टैरिफ और उससे निपटने की रणनीति के बारे में जानकारी देनी चाहिए थी, लेकिन वे इस पर चुप्पी साधे हुए हैं.
गौरतलब है कि सरकार ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों के आधार पर संशोधित करके पेश किया था. इस संशोधन का उद्देश्य 1995 के अधिनियम में बदलाव कर वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और तकनीकी सुधार लाना है.
हालांकि विपक्षी दलों, खासकर भारत गठबंधन (I.N.D.I.A) के सदस्यों ने इस विधेयक को जनविरोधी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला बताया है. आने वाले दिनों में इस पर सियासी माहौल और गरम हो सकता है.
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