Updated on: 03 April, 2025 04:17 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent
संसद के ऊपरी सदन में बोलते हुए रिजिजू ने सच्चर समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें राज्य वक्फ बोर्डों का विस्तार करने का सुझाव दिया गया था.
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू राज्यसभा में बोलते हैं. तस्वीर/पीटीआई
गुरुवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक पर विचार के लिए प्रस्ताव पेश किया. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार संसद के ऊपरी सदन में बोलते हुए रिजिजू ने सच्चर समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें समावेशिता बढ़ाने के लिए केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों का विस्तार करने का सुझाव दिया गया था. उन्होंने वक्फ संपत्तियों की संख्या के बारे में भी जानकारी दी और कहा कि सच्चर समिति ने 2006 में 4.9 लाख संपत्तियों से 12,000 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया था.
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रिपोर्ट के मुताबिक रिजिजू ने कहा, "आज की तारीख में 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं. 2006 में अगर सच्चर समिति ने 4.9 लाख वक्फ संपत्तियों से 12,000 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया था, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि अब इन संपत्तियों से कितनी आय हो रही होगी. सच्चर समिति ने यह भी सिफारिश की थी कि केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड को व्यापक बनाया जाना चाहिए ताकि उन्हें समावेशी बनाया जा सके. समिति ने महिलाओं और बच्चों के (लाभ) के लिए उठाए जाने वाले विशिष्ट कदमों की भी सिफारिश की".
उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रहे के रहमान खान के नेतृत्व में एक संयुक्त संसदीय समिति ने बुनियादी ढांचे (वक्फ के) के मुद्दे को उठाया और कम जनशक्ति और कम धन की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि पूरा मामला मुतवल्ली की नियुक्ति या हटाने पर केंद्रित है." रिपोर्ट के अनुसाए रिजिजू ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों से वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करने का आग्रह करते हुए कहा कि पिछली समितियों द्वारा दी गई सभी सिफारिशों को नए संशोधित विधेयक में शामिल किया गया है. उन्होंने कहा, "पहले दी गई सभी सिफारिशों को नए संशोधित विधेयक में शामिल किया गया है. ये समितियां यूपीए और कांग्रेस के अधीन थीं. इसलिए, मैं कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों से वक्फ संशोधन विधेयक 2025 का समर्थन करने की अपील करता हूं."
रिजिजू ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने देश भर के विभिन्न हितधारकों से परामर्श करने के बाद विधेयक का मसौदा तैयार किया था. उन्होंने उल्लेख किया कि कुल 284 संगठनों ने विधेयक पर प्रतिक्रिया दी और एक करोड़ से अधिक लोगों ने इस पर विचार व्यक्त करने के लिए ज्ञापन सौंपे. संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, "संयुक्त संसदीय समिति के गठन से पहले कई लोगों ने कहा था कि इस बारे में जो सांत्वना दी गई है, वह पर्याप्त नहीं है. मैं यह कहना चाहता हूं कि वक्फ संशोधन विधेयक पेश किए जाने से पहले अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने राज्य सरकारों के अल्पसंख्यक आयोग सहित हितधारकों को विश्वास में लेकर विधेयक तैयार किया था." रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, "जेपीसी ने पहले गठित किसी भी जेपीसी से कहीं अधिक व्यापक काम किया है. कुल मिलाकर, विभिन्न क्षेत्रों के 284 संगठनों ने राय दी. एक करोड़ से अधिक लोगों ने जेपीसी और मंत्रालय को अपनी राय दर्ज कराने के लिए ज्ञापन सौंपे. यह ऐतिहासिक है."
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