Updated on: 05 April, 2025 10:05 AM IST | mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent
अंबानी की यह यात्रा शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें कशिंग्स सिंड्रोम (एक दुर्लभ हार्मोनल विकार), मोटापा, अस्थमा और फेफड़े की गंभीर बीमारी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
Anant Ambani Padyatra
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी ने 170 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की है, जो जमनगर से द्वारका तक होगी. यह यात्रा भारतीय धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और अनंत अंबानी की आस्था और संकल्प को दिखाती है. उन्होंने 29 मार्च को जमनगर से अपनी यात्रा शुरू की और प्रतिदिन 20 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं. उनकी यह यात्रा 8 अप्रैल को समाप्त होगी, जो उनकी 30वीं जयंती से एक दिन पहले है.
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द्वारका, जो भारत के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है, अनंत अंबानी के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य है. वे इस यात्रा में हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और देवी स्तोत्र का जाप कर रहे हैं. यात्रा के दौरान उन्हें स्थानीय लोगों से बहुत सम्मान और आशीर्वाद मिला है. कई लोग उनके साथ कुछ हिस्सा यात्रा का चलने आए और उन्होंने द्वारकाधीश के चित्र भेंट किए.
अंबानी की यह यात्रा शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें कशिंग्स सिंड्रोम (एक दुर्लभ हार्मोनल विकार), मोटापा, अस्थमा और फेफड़े की गंभीर बीमारी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. बावजूद इसके, उन्होंने इस यात्रा को पूरा करने का संकल्प लिया है. उनका यह कदम सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है कि संकल्प और आस्था के साथ किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है.
अनंत अंबानी का धार्मिक जीवन हमेशा से ही चर्चाओं में रहा है. वे नियमित रूप से भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों का दौरा करते हैं, जैसे बद्रीनाथ, केदारनाथ, कामाख्या, नाथद्वारा और कालीघाट. इसके अलावा, वे इन धार्मिक स्थलों पर दान भी करते हैं.
व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी, अनंत अंबानी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वे रिलायंस इंडस्ट्रीज की दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी का संचालन करते हैं और देश के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की देखरेख भी करते हैं. इसके साथ ही, उन्होंने वंतरा नामक पशु आश्रय भी स्थापित किया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था.
अनंत अंबानी की यह यात्रा उनके धार्मिक विश्वास और व्यावसायिक सफलता को संतुलित करने की क्षमता को दर्शाती है. यह यात्रा न केवल उनकी आध्यात्मिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, बल्कि उनके संकल्प और संघर्ष की कहानी भी है.
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